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ब्रेकफास्ट छोड़ना Insulin Resistance को कैसे ट्रिगर कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सुबह का नाश्ता छोड़ना एक आम बात हो गई है। बहुत से लोग वक़्त बचाने या वज़न घटाने के चक्कर में ब्रेकफास्ट नहीं करते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके शरीर में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' जैसी गंभीर स्थिति को जन्म दे रही है? जब आप सुबह लंबे समय तक भूखे रहते हैं, तो शरीर का शुगर लेवल अनियंत्रित हो जाता है, जिससे इंसुलिन अपना काम ठीक से नहीं कर पाता। समय पर इसका इलाज और जीवनशैली में बदलाव करना इसलिएबेहद ज़रूरी है क्योंकि यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, पीसीओडी और हृदय रोगों की जड़ बनती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, इंसुलिन हमारे शरीर का एक चाबी की तरह काम करने वाला हार्मोन है जो कोशिकाओं का दरवाज़ा खोलता है ताकि शुगर ग्लूकोज अंदर जाकर ऊर्जा दे सके। इंसुलिन रेजिस्टेंस वह स्थिति है जहाँ कोशिकाएं इस चाबी को पहचानने से इनकार कर देती हैं या उनका दरवाज़ा 'जंग' खा जाता है। नतीजा यह होता है कि शुगर खून में ही घूमती रहती है और शरीर को ऊर्जा नहीं मिल पाती। शरीर इसे ठीक करने के लिए और ज़्यादा इंसुलिन बनाता है, जो अंततः मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह बिगाड़ देता है।

मेटाबॉलिक असंतुलन के विभिन्न चरण

इंसुलिन रेजिस्टेंस रातों-रात नहीं होता, यह इन पाँच चरणों में शरीर को प्रभावित करता है

प्रारंभिक चरण शरीर शुगर को संभालने के लिए सामान्य से थोड़ा ज़्यादा इंसुलिन बनाने लगता है।

हाइपरइन्सुलिनिमिया खून में इंसुलिन का स्तर बहुतज़्यादा बढ़ जाता है, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है।

प्री-डायबिटीज यहाँ शुगर का स्तर सामान्य से ऊपर रहने लगता है क्योंकि इंसुलिन अब हार मानने लगता है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम इसमें हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पेट की चर्बी एक साथ बढ़ने लगती है।

टाइप-2 डायबिटीज यह अंतिम चरण है जहाँ शरीर शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता लगभग खो देता है।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

पेट के पास चर्बी खान-पान सामान्य होने के बावजूद कमर के आसपास घेरा बढ़ना।

खाने के बाद सुस्ती भोजन के तुरंत बाद बहुत ज़्यादा थकान और नींद महसूस होना।

त्वचा का काला पड़ना गर्दन, बगल या कोहनियों की त्वचा का गहरा या मखमली काला Acanthosis Nigricans हो जाना।

बार-बार भूख लगना विशेष रूप से मीठा या कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ें खाने की तीव्र इच्छा होना।

घाव भरने में वक़्त लगना शरीर पर लगी छोटी चोटों को ठीक होने में सामान्य से ज़्यादा समय लगना।

ब्रेकफास्ट छोड़ना और इंसुलिन बिगड़ने के मुख्य कारण

कोर्टिसोल का बढ़ना नाश्ता न करने से शरीर तनाव हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ा देता है, जो इंसुलिन के काम में बाधा डालता है।

लंच में ओवरईटिंग सुबह भूखा रहने के बाद दोपहर में व्यक्ति ज़्यादा कैलोरी खाता है, जिससे शुगर अचानक 'स्पाइक' करती है।

शारीरिक सक्रियता की कमी व्यायाम न करने से मांसपेशियाँ शुगर का इस्तेमाल नहीं कर पातीं।

नींद का अभाव रात की अधूरी नींद इंसुलिन की संवेदनशीलता को कम कर देती है।

प्रसंस्कृत भोजन पैकेट बंद और मीठी चीज़ों का अत्यधिक सेवन पैंक्रियाज पर दबाव डालता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और जटिलताएं

जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

बैठकर काम करने वाली जीवनशैली दिन भर बिना हिले-डुले काम करने से मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है।

परिवार का इतिहास यदि माता-पिता में से किसी को डायबिटीज या मोटापे की समस्या रही हो।

तनावपूर्ण ज़िंदगी मानसिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ता है।

देर रात का भोजन सूरज ढलने के बहुत बाद खाना खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस काख़तरा बढ़ता है।

धूम्रपान तंबाकू शरीर में सूजन बढ़ाता है, जो इंसुलिन को बेअसर करती है।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

हृदय रोग इंसुलिन रेजिस्टेंस से धमनियां सख़्त हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा रहता है।

फैटी लीवर अतिरिक्त शुगर लीवर में वसा के रूप में जमा होने लगती है।

बांझपन और पीसीओडी महिलाओं में यह हार्मोनल असंतुलन पैदा कर प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।

याददाश्त में कमी लंबे समय तक रहने वाला यह असंतुलन दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।

किडनी की समस्या खून में शुगर बढ़ने से किडनी के फिल्टर पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस की जाँच कैसे की जाती है?

HOMA-IR टेस्ट यह सबसे सटीक टेस्ट है जो इंसुलिन और शुगर के आपसी तालमेल की जाँच करता है।

HbA1c टेस्ट पिछले 3 महीनों के औसत शुगर लेवल को जानने के लिए।

फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट खाली पेट शरीर में इंसुलिन की मात्रा को मापना।

लिपिड प्रोफाइल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को देखना, जो अक्सर इस बीमारी में बढ़ जाते हैं।

कमर-कूल्हा अनुपात शारीरिक माप के ज़रिए पेट की चर्बी और मेटाबॉलिक जोखिम का अनुमान लगाना।

आयुर्वेद में इंसुलिन रेजिस्टेंस 'प्रमेह' और 'आम'

आयुर्वेद में डायबिटीज को 'प्रमेह' कहा जाता है। इसमें 20 प्रकार के प्रमेह बताए गए हैं, जिनमें 'मधुमेह' सबसे गंभीर है

दोषों का असंतुलन आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ दोष बढ़ने से 'मेद' चर्बी बढ़ती है, जो मूत्र मार्ग को प्रभावित करती है।

मंदाग्नि का प्रभाव जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर 'आम' टॉक्सिन्स बनाता है, जो नसों में रुकावट पैदा करते हैं।

ओजस का क्षय मधुमेह में शरीर का सार तत्व यानी 'ओजस' पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाता है, जिससे मरीज़ कमज़ोर हो जाता है।

मेटाबॉलिज्म सुधारने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

गुडमार यह चीनी की तलब को कम करती है और पैंक्रियाज की कार्यक्षमता बढ़ाती है।

मेथी दाना यह कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करता है, जिससे इंसुलिन को काम करने का वक़्त मिलता है।

विजयसार यह खून को साफ़ करने और शुगर मेटाबॉलिज्म को ठीक करने की बेहतरीन लकड़ी है।

दारुहरिद्रा यह लीवर की कार्यक्षमता बढ़ाती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद करती है।

आयुर्वेदिक थेरेपी और पंचकर्म

विरेचन यह शरीर से अतिरिक्त कफ और विषाक्त पित्त को निकालकर मेटाबॉलिज्म कोतेज़ करता है।

उद्वर्तन औषधीय चूर्ण से सूखे मालिश, जो त्वचा के नीचे जमा वसा को पिघलाने मेंफ़ायदा पहुँचाती है।

बस्ती चिकित्सा औषधीय काढ़े के ज़रिए वात और कफ का संतुलन बनाना।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्या खाएं

साबुत अनाज जौ, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ करते हैं।

हरी सब्जियाँ लौकी, तोरई, करेला और मेथी जैसी सब्जियाँ जो फाइबर से भरपूर हों।

दालें और फल मूंग की दाल और फाइबर युक्त फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में।

क्या न खाएं

सफेद ज़हर चीनी, मैदा और सफेद चावल का सेवन बिल्कुल बंद कर देना ज़रूरी है।

मीठे फल आम, चीकू, अंगूर और केले जैसे फलों से बचें क्योंकि ये शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

तला-भुना भोजन बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद जूस शरीर में 'आम' Toxins बढ़ाते हैं।

ठीक होने में कितना समय लग सकता है?

इंसुलिन रेजिस्टेंस को उलटना Reverse मुमकिन है, लेकिन इसके लिए धैर्य कीज़रूरत होती है

2 से 4 हफ़्ते सही समय पर नाश्ता करने और चीनी बंद करने से ऊर्जा के स्तर में सुधार दिखने लगता है।

3 महीने नियमित आयुर्वेदिक दवाओं और योग से HbA1c और इंसुलिन के स्तर मेंज़्यादा सकारात्मक बदलाव आते हैं।

6 महीने यदि जीवनशैली पूरी तरह बदल ली जाए, तो फैटी लीवर और मोटापे जैसी जटिलताओं में स्थायी सुधार हो जाता है।

इलाज से क्या फ़ायदा मिल सकता है?

 1.वज़न पर नियंत्रण इंसुलिन संतुलित होने से जमा हुई चर्बी तेज़ी से घटने लगती है।

 2.दिन भर ऊर्जा शुगर स्पाइक रुकने से आप हर वक़्त खुद को ताज़ा और सक्रिय महसूस करेंगे।

 3.हार्मोनल संतुलन महिलाओं में पीरियड्स नियमित होते हैं और त्वचा की रंगत सुधरती है।

 4.भविष्य की सुरक्षा आप डायबिटीज और दिल की बीमारियों के ख़तरे से कोसों दूर हो जाते हैं।

 5.मानसिक स्पष्टता दिमाग का 'ब्रेन फॉग' खत्म होता है और एकाग्रता में सुधार आता है।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज  आयुर्वेदिक इलाज
लक्ष्य इसका मुख्य ध्यान रक्त में मौजूद शुगर को तुरंत नियंत्रित करने पर होता है। इसका लक्ष्य पाचन अग्नि को बढ़ाकर और पेनक्रियाज को सक्रिय कर शुगर के मूल कारण को ठीक करना है।
तरीका यह इंसुलिन या ओरल दवाओं के माध्यम से शरीर को बाहर से मदद देता है। यह शरीर की अपनी इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को सक्रिय करता है।
साइड इफ़ेक्ट लंबे समय तक दवाओं के सेवन से किडनी और पाचन तंत्र पर नुकसान का खतरा रहता है। जड़ी-बूटियों और संतुलित आहार पर आधारित, अपेक्षाकृत सुरक्षित और पोषण देने वाला उपचार।
दृष्टिकोण यह बीमारी के लक्षणों का इलाज करता है। यह मरीज़ की प्रकृति और 'होलिस्टिक हीलिंग' Holistic Healing पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  •  यदि आपको पर्याप्त खाने के बावजूद हर वक़्त कमज़ोरी और चक्कर महसूस हों।
  •  यदि कमर का घेरा Waistline तेज़ी से बढ़ रहा हो और काबू न आ रहा हो।
  •  यदि त्वचा पर काले निशान दिखने लगें या गर्दन के पास मस्से बढ़ जाएं।
  •  यदि बार-बार पेशाब आने की समस्या शुरू हो जाए।
  •  यदि रात में नींद बार-बार टूटे और सुबह उठने पर शरीर में भारीपन रहे।

निष्कर्ष

ब्रेकफास्ट छोड़ना केवल एक समय का खाना छोड़ना नहीं है, बल्कि अपनी पाचन अग्नि के साथ खिलवाड़ करना है। इंसुलिन रेजिस्टेंस एक चेतावनी है कि आपकीज़िंदगी को 'होलीस्टिक हीलिंग' कीसख़्त ज़रूरत है। आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपनाकर, सही समय पर खाकर और सक्रिय रहकर आप इस चक्र को तोड़ सकते हैं। अपनी सेहत के प्रति ज़िम्मेदार बनें और आज से ही अपने नाश्ते को प्राथमिकता दें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, नाश्ता छोड़ने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर भोजन को ऊर्जा के बजाय वसा के रूप में जमा करने लगता है।

प्रोटीन और फाइबर से भरपूर नाश्ता, जैसे बेसन का चीला या ओट्स, इंसुलिन को स्थिर रखने में मदद करता है।

जी हाँ, तनाव के दौरान निकलने वाला कोर्टिसोल हार्मोन इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देता है।

दालचीनी प्राकृतिक रूप से इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाती है, इसे गुनगुने पानी के साथ लेनाफ़ायदा पहुँचाता है।

शारीरिक व्यायाम मांसपेशियों को शुगर इस्तेमाल करने मेंमदद करता है, लेकिन इसके साथ सही आहार भीबेहद ज़रूरी है।

साबुत फल रेशों (Fiber) के कारण सुरक्षित हैं, लेकिन फलों का रस पीने से शुगरतेज़ी से बढ़ सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार, दिन में सोना और भारी-मीठा भोजन करना कफ बढ़ाता है, जो इस समस्या की मुख्य जड़ है।

गलत खान-पान और जंक फूड के कारण आजकल बच्चों में भी मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण दिख रहे हैं।

बिल्कुल नहीं! खाली पेट कैफीन एसिडिटी बढ़ाता है और इंसुलिन के संतुलन को बिगाड़ता है।

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